Respiration in Plants | पादपों में श्वसन

अन्य जीवों की भाँति पादप (plant) भी जीवित रहने के लिए श्वसन (respiration) करते है। जैसा कि हम सब को ज्ञात है पौधे वायु से ऑक्सीजन (oxygen) अंदर लेते है और कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide) को निर्मुक्त करते है। इनकी कोशिकाओं में भी ऑक्सीजन का उपयोग अन्य जीवों की भाँति ही ग्लूकोस के कार्बन डाइऑक्साइड और जल में विखंडन करने के लिए किया जाता है। पादप में प्रत्येक अंग वायु से स्वतंत्र रूप से ऑक्सीजन ग्रहण करके कार्बन डाइऑक्साइड को निर्मुक्त कर सकता है।

रंध्र stoma : हम जानते है कि पत्तियों की सतह पर अनेक सूक्ष्म छिद्र पाए जाते है, जिन्हें रंध्र कहते है। जिनके द्वारा ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का विनिमय होता है।

पादप की अन्य सभी कोशिकाओं की भाँति ही मूल कोशिकाओं को भी ऊर्जा उत्पन्न करने ले लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। मूल मृदा कणों के बीच के खली स्थानों (वायु अवकाशों) में उपस्थित वायु से ऑक्सीजन ले लेते है।

श्वसन respiration : सजीव कोशिकाओं में संपन्न होने वाली वह प्रक्रिया है जिसमे उच्च ऊर्जा वाले जटिल कार्बनिक पदार्थ विघटित होकर सरल एवं निम्न ऊर्जा वाले अणुओं का निर्माण करते है व ऊर्जा मुक्त होती है।

इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड का विमोचन (निकलना), ऑक्सीजन का उपयोग एवं विभव ऊर्जा का गतिज ऊर्जा में परिवर्तन होता है। इस प्रकार मुक्त होने वाली ऊर्जा का उपयोग कोशिका में संपन्न होने वाली समस्त क्रियाओं में किया जाता है। श्वसन सभी सजीवों का आधारभूत लक्षण है।

अधिकांश जंतु व पादप श्वसन क्रिया में O2 को मुक्त करते है।

श्वसन के क्रियाधर या श्वासनाधार respirator :

श्वसन अभिक्रिया में भाग लेने वाले उच्च ऊर्जा युक्त पदार्थ या यौगिक जो ऑक्सीकृत होकर ऊर्जा मुक्त करते है, श्वसन के क्रियाधार कहलाते है।
ये क्रियाधार कार्बोहाइड्रेट, वसा एवं प्रोटीन के अणुओं के रूप में कोशिका में संग्रहित रहते है।
प्राथमिक क्रियाधार कार्बोहाइड्रेट है, जो श्वसन में सबसे पहले उपयोग में लिया जाता है। हैक्सोज शर्करा भी कार्बोहाइड्रेट है।
कार्बोहाइड्रेट न हो तो वसा, वसा न हो तो प्रोटीन का ऑक्सीकरण होता है।

प्लावी श्वसन floaty respiration : कार्बोहाइड्रेट से होने वाले श्वसन को ब्लैकमैन ने प्लावी श्वसन कहा।

जीवद्रव्य श्वसन protoplasm respiration : प्रोटीन से होने वाले श्वसन को जीवद्रव्य श्वसन कहते है। ये अधिकांशतः भुखमरी एवं रोगो के समय होता है।

श्वसन के प्रकार Types of Respiration :

श्वसन दो प्रकार का होता है –

(i) ऑक्सी श्वसन Aerobic respiration : ऐसा श्वसन जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में हो, ऑक्सी श्वसन कहलाता है।
इस प्रकार के श्वसन में कार्बनिक खाद्य पदार्थ का जल एवं CO2 में पूर्ण अपघटन हो जाता है एवं अधिक मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है। सभी जंतुओं और पौधों में यह श्वसन की सामान्य विधि है।
ऑक्सी श्वसन को निम्न रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है –
\(\displaystyle {{C}_{6}}{{H}_{{12}}}{{O}_{6}}+6{{O}_{2}}\to 6C{{O}_{2}}+6{{H}_{2}}O+686\,\,k.cal\)

ऑक्सीश्वासन माइटोकॉन्ड्रिया में होता है। जिसमे दो चरण होते है –
(a) क्रेब्स चक्र     (b) इलेक्ट्रान परिवहन तंत्र
माइटोकॉन्ड्रिया में क्रिस्टी की सतह पर अनेक संवृत कण होते है, जिन्हें F1 , प्रारम्भिक कण या ऑक्सीसोम कहते है। इन कणों में प्रोटीनों का परिवहन होता है, जिससे ATP का निर्माण होता है।
माइटोकॉन्ड्रिया की मैट्रिक्स में श्वसन क्रिया से सम्बंधित विभिन्न एन्ज़ाइम, सहएन्ज़ाइम (जैसे FAD, NADP, ADP) इलेक्ट्रान वाहक राइबोसोम्स, RNA, तथा DNA अंतर्विष्ट होते है।

(ii) अनाक्सी श्वसन Anaerobic respiration : ऐसा श्वसन जिसमे ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती, अनाक्सी श्वसन कहलाता है।
इस प्रकार के श्वसन में कार्बनिक पदार्थ का पूर्ण ऑक्सीकरण नहीं होता है तथा एल्कोहल अथवा कार्बनिक अम्ल एवं CO2 का निर्माण होता है। इस प्रकार के श्वसन को अंतरअणुक श्वसन भी कहते है।
अनाक्सी श्वसन को निम्न रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है –
\(\displaystyle {{C}_{6}}{{H}_{{12}}}{{O}_{6}}\to 2{{C}_{2}}{{H}_{2}}OH+2C{{O}_{2}}+56\,\,k.cal\)
यह श्वसन संग्रहित व अंकुरित होते हुए बीजों, मांसल फलों, अस्थायी रूप से एवं कई कवकों तथा जीवाणुओं में नियमित रूप से पाया जाता है।

ऑक्सीश्वसन की क्रियाविधि mechanism of oxygen respiration: ऑक्सी व अनाक्सीश्वसन की प्रारम्भिक अभिक्रियाएं कोशिकाद्रव्य में संपन्न होती है।

ग्लाइकोलिसिस glycolysis – कोशिकाद्रव्य में ग्लूकोज का एक अणु विघटित होकर पाइरुविक अम्ल के 2 अणु बनता है एवं ऊर्जा मुक्त होती है। इसे ग्लाइकोलिसिस या EMP पथ कहते है। इस क्रिया हेतु ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है।
ग्लाइकोलिसिस में निर्मित पाइरुविक अम्ल माइटोकॉन्ड्रिया में पहुँच कर ऐसिटिल को-एन्ज़ाइम ए का निर्माण करता है।

माइटोकॉन्ड्रिया में ही क्रेब्स चक्र Krebs cycle (TCA चक्र) द्वारा जल, CO2 एवं ऊर्जा मुक्त करता है। इस क्रिया में ग्लूकोस का पूर्ण ऑक्सीकरण O2 की उपस्थिति में होता है।

वायु श्वसन या ऑक्सीश्वसन की सम्पूर्ण क्रियाविधि को तीन भागों में बनता जा सकता है।
(a) ग्लाइकोलिसिस glycolysis     (b) क्रेब्स चक्र Krebs cycle (त्रिकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र tricarboxylic acid cycle)     (c) इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र electron transport system

(a) ग्लाइकोलिसिस glycolysis :

  • ग्लाइकोलिसिस शब्द ग्रीक भाषा के शब्द ग्लाइकोज अर्थात शर्करा तथा लाइसिस अर्थात टूटना से लिया गया है।
  • ग्लाइकोलिसिस की क्रिया कोशिकाद्रव्य में संपन्न होती है।
  • इस क्रिया हेतु ऑक्सीजन की आवश्यकता नहीं होती है।
  • यह ऑक्सीश्वसन तथा अनाक्सीश्वसन दोनों में पायी जाती है।
  • इस क्रिया में ग्लूकोज के एक अणु का क्रमबद्ध जैव रासायनिक अभिक्रियाओं द्वारा पाइरुविक अम्ल में विघटन हो जाता है तथा ऊर्जा मुक्त होती है। अर्थात फ्रक्टोज 1-5 डाई फास्फेट के 1 अणु से पाइरुविक अम्ल के दो अणुओं का निर्माण होना ग्लाइकोलिसिस कहलाती है।
  • ग्लाइकोलिसिस में 6 कार्बन वाले ग्लूकोज के एक अणु के विखंडन से 3 कार्बन युक्त पाइरुविक अम्ल के दो अणु निर्मित होते है।
  • पाइरुविक अम्ल ग्लाइकोलिसिस अम्ल या EMP पथ का अंतिम उत्पाद है।
  • ग्लाइकोलिसिस अभिक्रिया में 4 अणु ATP का निर्माण सब्सट्रेट स्तरीय फास्फोरीलीकरण में होता है जिसमे 2 अणु खर्च हो जाते है। अतः शुद्ध लाभ 2ATP अणुओं का होता है।
  • इलेक्ट्रान परिवहन तंत्र (ETS) द्वारा 6ATP का नार्मन होता है।
  • इस अभिक्रिया में न तो O2 का उपयोग होता है तथा न ही कही पर CO2 का निर्माण होता है।

दूसरा चरण

  • माइटोकॉन्ड्रिया में पाइरुविक अम्ल का दूसरा चरण आरम्भ होता है।
  • पाइरुविक अम्ल के दो अणुओं के ऑक्सीकरण से दो अणु ऐसिटिल को-एन्जाइम ए एवं 2 अणु NADH2 के बनाते है।
  • इन NADH2 के 2 अणु से 6ATP अणुओं का निर्माण होता है।

(b) क्रेब्स चक्र Krebs cycle (सिट्रिक अम्ल, टी सी ए)

  • क्रेब्स चक्र का प्रथम उत्पाद सिट्रिक अम्ल बनता है। अतः इसे सिट्रिक अम्ल चक्र भी कहते है।
  • सिट्रिक अम्ल में अम्लीय ग्रुप (-COOH) के तीन अणु होते है, इसलिए इस चक्र को त्रिकार्बोक्सिलिक अम्ल चक्र भी कहते है।
  • इस चक्र में सबसे पहले 2 कार्बन वाला ऐसिटिल को एन्जाइम ए अपने ऐसिटिल समूह के दोनों कार्बन परमाणु ऑक्सेलोएसिटिक अम्ल को स्थानांतरित करके 6 कार्बन परमाणु वाला सिट्रिक अम्ल बनता है।
  • यह सम्पूर्ण क्रिया माइटोकॉन्ड्रिया में होती है।

क्रेब्स चक्र का महत्व – क्रेब्स चक्र में ATP के अणुओं का निर्माण होता है, जिससे विभिन्न कार्यों के लिए ऊर्जा मिलती है।

(c) इलेक्ट्रान परिवहन तंत्र electron transport system (ETS)

  • क्रेब्स चक्र के अंत में ग्लूकोज का पूर्ण ऑक्सीकरण हो जाता है परन्तु ऊर्जा इलेक्ट्रान परिवहन तंत्र के द्वारा NADH2 तथा FADH2 के ऑक्सीकरण के बाद ही मुक्त होती है।
  • इलेक्ट्रान उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर की ओर होता है।

ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में पाइरुविक अम्ल का विघटन dissolution of pyruvic acid in the absence of oxygen

ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में पाइरुविक अम्ल का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है। जिसे अनाक्सी श्वसन कहते है। इस अभिक्रिया में सबसे पहले किण्वन (डि-कार्बोक्सिलिकरण) द्वारा एसीटैल्डिहाइड का निर्माण होता है। जिसमे CO2 मुक्त होती है।
एसीटैल्डिहाइड स्वयं अपचयित होकर एल्कोहल बनाता है व NADH+H+ का उपचयन NAD+ में हो जाता है। ये दोनों क्रियाएं डिकार्बोक्सिलेज एंजाइमों द्वारा उत्प्रेरित होती है।

किण्वन Fermentation :

अधिकांश जीवाणुओं एवं कवकों में होने वाली क्रिया है। यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में संपन्न होती है। इसमें शर्करा का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है तथा ऐल्कोहल अथवा कार्बोक्सिलिक अम्लों का निर्माण होता है एवं CO2 मुक्त होती है।
किण्वन की खोज लुइ पाश्चर ने की थी।

श्वसन क्रिया में श्वसनाधारों में अन्तर्सम्बन्ध –

श्वसन क्रिया में श्वसनाधारों के रूप में सजीव सामान्यतः कार्बोहाइड्रेट का उपयोग करते है, परन्तु कुछ पादपों में विशेष परिशतितियों में प्रोटीन, वसा तथा कार्बनिक अम्लों को भी श्वसन क्रियाधर के रूप में प्रयोग में लिया जाता है।

  • यदि शवासन में वसा क्रियाधर है तो प्रोटीएज एन्जाइम द्वारा विघटित होकर अमीनों अम्ल के रूप में पाइरुविक अम्ल के साथ श्वसन पथ में प्रवेश करता है।
  • श्वसन क्रिया में काम आने वाले श्वासनधारों के उपयोग के अनुसार कार्बोहाइड्रेट तत्पश्चात क्रमश: वसायें, कार्बनिक अम्ल व अंत में प्रोटीन होते है।

श्वसन गुणांक respiration coefficient (RQ) –

श्वसन में मुक्त होने वाली CO2 एवं प्रयुक्त होने वाली O2 के आयतनों का अनुपात श्वसन गुणांक कहलाता है।
श्वसन गुणांक का मापन गैनान्स श्वसनमापी या रेस्पाइरोमीटर के श्वसनमापी द्वारा किया जाता है।
Shvasan Gunank (RQ) Folmula

  • कार्बोहाइड्रेट का श्वसन गुणांक = 1
  • वसा का श्वसन गुणांक = 0.7 (1 से कम)
  • प्रोटीन का श्वसन गुणांक = 0.7-0.9 (1 से कम)
  • कार्बोक्सिलिक अम्लों का श्वसन गुणक = 1 से अधिक (सिट्रिक अम्ल का = 1.14, मैलिक अम्ल का = 1.33)
  • मांसल या सरस पादपों का श्वसन गुणांक = 0

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