संख्याएँ (Number) परिमेय संख्याएँ, अपरिमेय संख्याएँ

आज हम संख्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।
संख्याओं का अपना ही एक रोमांचकारी ज्ञान होता है।बिना संख्याओं के गणित का ज्ञान सम्भव नहीं है।

संख्या किसे कहते है ? संख्याएँ क्या होती है ?

ऐसी गणित की सामग्री जिनका उपयोग प्राय: किसी वास्तु को जोड़ने में, गिनने में या नापने में किया जाता है, संख्या कहलाती है।
संख्याएँ निम्न प्रकार की होती है –

सम संख्याएँ

ऐसी संख्याएँ जिनमें दो का पूरा पूरा भाग जाता है। सम संख्याएँ कहलाती है।
जैसे – 2, 4, 6, 8, 10 आदि।

विषम संख्याएँ

ऐसी संख्याएँ जिनमें 2 का पूरा – पूरा भाग नही जाता है। विषम संख्याएँ कहलाती है।
जैसे – 3, 5, 7, 9, 11, 13 आदि।

प्राकृत संख्याएँ

ऐसी संख्याये जो संख्या रेखा पर 1 से प्रारम्भ होकर अनन्त तक जाती है प्राकृत संख्याये कहलाती है। 
जैसे – 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, ………………………………. ∞
Note – सबसे छोटी प्राकृत संख्या 1 है।

पूर्ण संख्याएँ

वह संख्याएँ जो 0 से प्रारम्भ होकर अनंत तक जाए, पूर्ण संख्याएँ कहलाती है।
जैसे – 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, ………………. ∞
Note – * सबसे छोटी पूर्ण संख्या 0 है।
* प्राकृत संख्या में 0 मिला (जोड़) देने से वह पूर्ण संख्या बन जाती है।

पूर्णांक संख्याएँ

ऐसी संख्याएँ जो संख्या रेखा पर 0 से प्रारम्भ होकर दोनों और अनन्त तक जाए, पूर्णांक संख्या कहलाती है।
जैसे – ∞ ……………… -5, -4, -3, -2, -1, 0 1, 2, 3, 4, 5, …………… ∞

परिमेय संख्याएँ

ऐसी संख्याएँ जिन्हें $frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, परिमेय संख्याएँ कहलाती है। (जहाँ q ≠ 0)
जैसे – 8/5, 4/5, 9/2, 56/10 आदि।

अपरिमेय संख्याएँ

ऐसी संख्याएँ जिन्हें $frac{p}{q}$ के रूप में लिखा जा सकता है, परिमेय संख्याएँ कहलाती है। (जहाँ q ≠ 0)
उदाहरण – √2, √3 आदि।

परवर्ती संख्याएँ

किसी संख्या में 1 जोड़ने पर प्राप्त संख्या उसकी परवर्ती संख्या कहलाती हैं। अर्थात किसी भी संख्या में 1 जोड़ने पर हमें अगली संख्या प्राप्त होती है।
परवर्ती संख्याओं के उदाहरण – 16 + 1 = 17,
– 3 + 1 = – 2,

पूर्ववर्ती संख्याएँ

किसी भी संख्या के ठीक पहले आने वाली संख्या को पूर्ववर्ती संख्याएँ कहते है। अर्थात किसी संख्या के ठीक पहले आने वाली संख्या को पूर्ववर्ती संख्या कहते है।
पूर्ववर्ती संख्याओं के उदाहरण – 17 – 1 = 18,
– 45 – 1 = – 46

संख्या रेखा

संख्या रेखा एक रेखा होती है, जिसके दाईं ओर धनात्मक पूर्णांक तथा बाई ओर ऋणात्मक पूर्णांक व मध्य में शून्य होता है।
  • संख्या रेखा में बायें से दायें जाने पर संख्याओं का क्रम (मान) बढ़ता है।
  • संख्या रेखा में दायें से बाएं जाने पर संख्याओं का क्रम (मान) घटता है।
 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!