NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Ruchira Chapter 7 Hindi Translate | सप्तम: पाठ: सङ्कल्प: सिद्धिदायक: हिंदी अनुवाद

NCERT Solutions for class 7 Sanskrit Ruchira Chapter 7 Hindi Translate Sandkalp Siddhidayak Sanskrit Ruchira Dvitiyo Bhag hindi anuvad/arth सङ्कल्प: सिद्धिदायक: हिंदी अनुवाद संकल्प को प्राप्त करना, available free in eteacherg.com। Here We learn what is in this lesson in Sanskrit class 7 NCERT solutions सङ्कल्प: सिद्धिदायक: and how to solve questions एनसीइआरटी कक्षा 7 संस्कृत रुचिरा द्वितीयो भाग: सप्तमवर्गाय संस्कृतपाठ्यपुस्तकम् सप्तम: पाठ: सङ्कल्प: सिद्धिदायक: का हिंदी अनुवाद और प्रश्न उत्तर सम्मिलित है।

ncert solutions for class 7 sanskrit Ruchira Dvitiyo Bhag Chapter 7 सङ्कल्प: सिद्धिदायक: NCERT sanskrit 7th class – Ruchira Dvitiyo Bhag Chapter 7 are part of NCERT class 7 chapter 7 sanskrit solution Ruchira. Here we have given NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit paath 7 Hindi arth सङ्कल्प: सिद्धिदायक:। NCERT Sanskrit translation in Hindi for sanskrit class 7 ncert solutions Ruchira Chapter 7 सङ्कल्प: सिद्धिदायक: Below. These solutions consist of answers to all the important questions in NCERT संस्कृत कक्षा ७ book chapter 7। 

Here we solve ncert solutions for class 7 sanskrit Ruchira Chapter 7 सङ्कल्प: सिद्धिदायक: हिंदी अनुवाद और प्रश्नों के उत्तर concepts all questions with easy method with expert solutions. It help students in their study, home work and preparing for exam. Soon we provide sanskrit class 7 ncert solutions Ruchira chapter 7 hindi anuvaad aur prashan uttr question and answers. is provided here according to the latest NCERT (CBSE) guidelines. Students can easily access the hindi translation which include important Chapters and deep explanations provided by our expert. Get CBSE in free PDF here. ncert solutions for 7th class Sanskrit book pdf also available Click Here or you can download official NCERT website. You can also See NCERT Solutions for Sanskrit class 7 Sanskrit book pdf with answers all Chapter to Click Here.

ncert solutions for class 7 sanskrit Ruchira

कक्षा – 7 सप्तमवर्गाय संस्कृतपाठयपुस्तकम्
सप्तम: पाठ: पाठ – 7
सङ्कल्प: सिद्धिदायक:

ncert solutions for class 7 sanskrit Ruchira Chapter 7 Hindi Translate
सङ्कल्प: सिद्धिदायक: पाठ का हिंदी अनुवाद संकल्प को प्राप्त करना।

सङ्कल्प: सिद्धिदायक:

(पार्वती शिव पतिरूपेण अवाञ्छत्। एतदर्थ सा तपस्यां कर्तुम् ऐच्छत्। सा स्वकीयं मनोरथं मात्रे न्यवेदयत्। तत् श्रुत्वा माता मेना चिन्ताकुला अभवत्।)
मेना – वत्से ! मनीषिता: देवता: गृहे एव सन्ति। तप: कठिनं भवति। तव शरीरं सुकोमलं वर्तते। गृहे एवं वस। अत्रेव तवाभिलाष: सफल: भविष्यति।
पार्वती – अम्ब! तादृश: अभिलाष: तु तपसा एव पूर्ण: भविष्यति। अन्यथा तादृशं पतिं कथं प्राप्स्यामि। अहं तपः एवं चरिष्यामि इति मम सङ्कल्प:।

हिन्दी अनुवाद 
(पार्वती ने शिव को पति के रुप में प्राप्त करने की इच्छा की। इसके लिये वह तपस्या करनी चाहती थी। उन्होनें अपने मन की इस कामना को माता को बताया। यह सुनकर माता मेना चिन्ता से परेशान हो गई।)
मेना – हे पुत्री ! (तुम्हारे द्वारा) चाहा गया देवता (तो) घर में ही हैं। तपस्या कठिन होती हैं। तुम्हारा शरीर कोमल है। (तुम) घर में ही निवास करो। यहाँ पर ही तुम्हारी इच्छा सफल हो जायेगी।
पार्वती – हे माता, वैसी इच्छा तो तपस्या के द्वारा ही पूरी होगी। अन्यथा वैसा पति कैसे प्राप्त कर पाऊँगी। ‘मै तपस्या ही करुँगी’ (ऐसा) मेरा संकल्प है।

मेना – पुत्रि! त्वमेव मे जीवनाभिलाष:।
पार्वती – सत्यम्। परं मम मन: लक्ष्यं प्राप्तुम् आकुलितं वर्तते। सिद्धिं प्राप्य पुनः तवैव शरणम् आगमिष्यामि। अद्यैव विजयया साकं गौरीशिखरं गच्छामि।

(तत: पार्वती निष्क्रामति)
(पार्वती मनसा वचसा कर्मणा च तप: एव तपति स्म। कदाचिद् रात्रौ स्थण्डिले, कदाचिच्च शिलायां स्वपिति स्म। एकदा विजया अवदत्।)

हिन्दी अनुवाद 
मेना – बेटी, तुम मेरे जीवन की चाह हो।
पार्वती – सत्य है। परन्तु मेरा मन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए व्याकुल है। सफलता प्राप्त करके पुनः तुम्हारी ही शरण में आ जाँउगी। आज ही विजया के साथ गौरी-शिखर में आ जाँउगी।

(तब पार्वती निकल जाती है।)
(पार्वती मन से, वाणी से, तथा कर्म से तपस्या करने लगी। कभी रात को जमीन पर और कभी पत्थर पर सो जाया करती थी। एक बार विजया बोली)

विजया – सखि! तप:प्रभावात् हिंस्रपशवोऽपि तव सखाय: जाता:। पञ्चाग्नि – व्रतमपि त्वम् अतपः। पुनरपि तव अभिलाषः न पूर्णः अभवत्।
पार्वती – अयि विजये! किं न जानासि? मनस्वी कदापि धेर्य न परित्यजति। अपि च मनोरथानाम् अगति: नास्ति।
विजया – त्वं वेदम् अधीतवती। यज्ञं सम्पादितवती। तपःकारणात् जगति तव प्रसिद्धि:। ‘अपर्णा’ इति नाम्ना अपि त्वं प्रथिता। पुनरपि तपस: फलं नैव दृश्यते।

हिन्दी अनुवाद 
विजया – हे सखी , तप के प्रभाव से खूंखार पशु भी तुम्हारे मित्र बन गए हैं। तुमने पंचाग्नि व्रत भी किया है। फिर भी तुम्हारी इच्छा पूर्ण नहीं हुई।
पार्वती – अरे विजया, क्या (तुम) नहीं जानती? महापुरुष कभी धैर्य का त्याग नहीं करता है। और इच्छाओं की विफलता भी नहीं होती हैं।
विजया – तुमने वेदों का अध्ययन किया। यज्ञ संपन्न किए। तपस्या के कारण संसार में तुम्हारी प्रासिद्धि है। ‘अपर्णा’ इस नाम से भी तुम प्रासिद्ध हो। फिर भी तपस्या का फल दिखाई ही नहीं पड़ता है।

पार्वती – अयि आतुरह्रदये। कथं त्वं चिन्तिता ¨¨¨¨।
(नेपथ्ये – आयि भो! अहम् आश्रमवटु:। जलं वाञ्छामि।)
(ससम्भ्रमम्) विजये! पश्य कोऽपि वटु: आगतोऽस्ति।
(विजया झटिति अगच्छत्, सहसैव वटुरूपधारी शिव: तत्र प्राविशत्)
विजया – वटो! स्वागतं ते। उपविशतु भवान्। इयं मे सखी पार्वती। शिवं प्राप्तुम् अत्र तप: करोति।

हिन्दी अनुवाद
पार्वती – अरे, व्याकुल हृदय वाली, तुम चिन्तित क्यों हो ¨¨¨¨।
(नेपथ्य में – अरे, मैं आश्रम का ब्रह्मचारी हूँ। जल पीना चाहता हूँ।)
(घबराहट कें साथ) हे विजया, देखो कोई ब्रह्मचारी आया है।
(विजया शीघ्र गई। अचानक ही ब्रह्मचारी रुपधारी शिव वहाँ प्रवेश करते हैं।)
विजया – हे ब्रह्मचारी, तुम्हारा स्वागत है। आप बैठिए। यह मेरी सखी पार्वती है। शिव को प्रपत करने के लिए यहाँ तपस्या करती है।

वटुः – हे तपस्विनि! किं क्रियार्थ पूजोपकरणं वर्तते, स्नानार्थ जल॑ सुलभम्, भोजनार्थ फल वर्तते? त्वं तु जानासि एव शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।
(पार्वती तूष्णीं तिष्ठति)
वटुः – हे तपस्विनि! किमर्थ तप: तपसि? शिवाय?
(पार्वती पुनः तूष्णीं तिष्ठति)
विजया – (आकुलीभूय) आम्, तस्मै एव तप: तपति।

(वटुरूपधारी शिव: सहसैव उच्चै: उपहसति)

हिन्दी अनुवाद 
ब्रह्मचारी – हे तपस्विनि ! क्या तप के लिए पूजा की सामग्री है, स्नान करने के लिए जल आसानी से मिल जाता है और भोजन के लिए फल हैं ? तुम तो जानती ही हो प्रथम धर्म साधन निश्चित रुप से शरीर हैं।

(पार्वती चुप खड़ी हो जाती है।)
ब्रह्मचारी – हे तपस्विनि, किस लिए तप कर रही हो? शिव के लिए?
(पार्वती पुनः चुप खड़ी हो जाती है।)
विजया – (परेशान होकर) हाँ, उनके लिए ही तपस्या कर रही है।

(ब्रह्मचारी रुप धारी शिव एकदम जोर से हँसते हैं।)

वटुः – अयि पार्वति! सत्यमेव त्वं शिवं पतिम् इच्छसि? (उपहसन्) नाम्ना शिव: अन्यथा अशिव:। श्मशाने वसति। यस्य त्रीणि नेत्राणि, वसनं व्याघ्रचर्म, अङ्गराग: चिताभस्म, परिजनाश्च भूतगणा:। किं तमेव शिवं पतिम् इच्छसि?
पार्वती – (क्रुद्धा सती) अरे वाचाल! अपसर। जगति न कोऽपि शिवस्य यथार्थ स्वरूपं जानाति। यथा त्वमसि तथेव वदसि।
(विजयां प्रति) सखि! चल। य: निन्दां करोति सः तु पापभाग् भवति एवं, य: शृणोति सोऽपि पापभागू भवति।

हिन्दी अनुवाद 
ब्रह्मचारी – अरे पार्वती, क्या यह सत्य है कि तुम शिव को ही पति के रूप में प्राप्त करना चाहती हो। हँसकर वह नाम से ही शिव हैं, वरना अशिव है। (वह) शमशान में रहता है। जिसके तीन नेत्र हैं, वस्त्र बाघ का चमड़ी हैं, शरीर पर लेप चिता की राख है तथा मित्रगण भूतों की टोली है। क्या (तुम) उस शिव को ही पति चाहती हो?
पार्वती – (क्रोधित होकर) अरे बड़बोले हट जा। संसार में कोई भी शिव के वास्तविक स्वरुप को नहीं जानता है। जैसे तुम हो वैसा ही बोलते हो।
(विजया के प्रति) सखी, चलो। जो निन्दा करता है, वह तो पापी होता हैं, जो सुनता है वह भी पापी होता हैं।

(पार्वती द्रुतगत्या निष्क्रामति। तदैव पृष्ठत: वटो: रूपं परित्यज्य शिवः तस्या: हस्त गृह्णाति। पार्वती लज्जया कम्पते)
शिव: – पार्वति! प्रीतोऽस्मि तव सङ्कल्पेन। अद्यप्रभृति अहं तव तपोभि: क्रीतदासोऽस्मि।
(विनतानना पार्वती विहसति)

हिन्दी अनुवाद 
(पार्वती तेज गती से निकलती हैं। तभी पीछे से ब्रह्मचारी रुप को छोड़कर शिव उसका हाथ पकड़ लेते हैं। पार्वती लज्जा से कांपती है।)

शिव – हे पार्वती ! तुम्हारे सङ्कल्प से मैं प्रसन्न हूँ। आज से आगे मैं तुम्हारा तपस्या से ख़रीदा हुआ दास हूँ।
(मुँह नीचे की ओर करके पार्वती मुस्कराती है।)

 

NCERT Solutions for Class 7 Sanskrit Ruchira

एनसीइआरटी कक्षा 7 संस्कृतपाठ्यपुस्तकम् रुचिरा द्वितीयो: भाग: सप्तवर्गाय के सभी पाठों के प्रश्न-उत्तर (समाधान) और हिंदी अनुवाद

Here we solve Ncert class 7 Sanskrit Ruchira Dvitiyo Bhagh all chapter Hindi translate and solution given below. Student can read an download it.

क्र. सं. पाठ पाठ का नाम समाधान लिंक
1. प्रथमः पाठः सुभाषितानि संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
2. द्वितीयः पाठः दुर्बुद्धि: विनश्यति संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
3. तृतीयः पाठः स्वावलम्बनम् संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
4. चतुर्थः पाठः हास्यबालकविसम्मेलनम् संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
5. पञ्चमः पाठः पण्डिता रमाबाई संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
6. षष्ठः पाठः सदाचार: संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
7. सप्तमः पाठः सङ्कल्प: सिद्धिदायक: संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
8. अष्टमः पाठः त्रिवर्ण: ध्वज: संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
9. नवमः पाठः अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
10. दशमः पाठः विश्वबन्धुत्वम् संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
11. एकादशः पाठः समवायो हि दुर्जय: संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
12. द्वादशः पाठः विद्याधनम् संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
13. त्रयोदशः पाठः अमृतं संस्कृतम् संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
14. चतुर्दशः पाठः अनारिकाया: जिज्ञासा संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक
15. पञ्चदशः पाठः लालनगीतम् संस्कृत से हिन्दी अनुवाद क्लिक
प्रश्न-उत्तर क्लिक

Leave a Reply

Your email address will not be published.

error: Content is protected !!